Tuesday, 9 October 2012
Monday, 1 October 2012
चोट पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया,
पत्थर को बुत की शकल में लाने का शुक्रिया.
जागा रहा तो मैंने नए काम कर लिए,
ऐ - नींद आज तेरे ना आने का शुक्रिया.....
सूखा पुराना ज़ख़्म नए को जगह मिली,
स्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया...
अश्कों सा माँ की गोद में आकर सिमट गया,
नज़रों से अपनी, मुझको गिराने का शुक्रिया.....SANDEEP SIR
अश्कों सा माँ की गोद में आकर सिमट गया,
नज़रों से अपनी, मुझको गिराने का शुक्रिया.....SANDEEP SIR
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